श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.91.25 
ततोऽभ्यवर्षन्त घना दिव्या: कुसुमवृष्टय:।
देवदुन्दुभिघोषश्च दिक्षु सर्वासु शुश्रुवे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मेघों ने दिव्य पुष्पों की वर्षा आरम्भ कर दी और देवताओं की प्रार्थनाओं की मधुर ध्वनि समस्त दिशाओं में सुनाई देने लगी ॥25॥
 
After that the clouds started showering divine flowers. The sweet sound of the prayers of the Gods started being heard in all directions. 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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