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ramayan 2.91.22: इस प्रकार उत्तम व्रत का पालन करने वाले भरद्वाज मुनि ने एकाग्र मन और अतुलनीय तेज से युक्त होकर शिक्षा (शिक्षाशास्त्र में वर्णित उच्चारण विधि) और स्वर (व्याकरणशास्त्र के अनुसार प्रकृति-प्रत्यय से संबंधित) से युक्त वाणी द्वारा उन सबको आवाहन किया॥22॥   |   ramayan सर्ग 2.91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.91.22 
एवं समाधिना युक्तस्तेजसाप्रतिमेन च।
शिक्षास्वरसमायुक्तं सुव्रतश्चाब्रवीन्मुनि:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उत्तम व्रत का पालन करने वाले भरद्वाज मुनि ने एकाग्र मन और अतुलनीय तेज से युक्त होकर शिक्षा (शिक्षाशास्त्र में वर्णित उच्चारण विधि) और स्वर (व्याकरणशास्त्र के अनुसार प्रकृति-प्रत्यय से संबंधित) से युक्त वाणी द्वारा उन सबको आवाहन किया॥22॥
 
In this way, Bhardwaj Muni, who observed the best fast, with a concentrated mind and full of incomparable brilliance, appealed to all of them in a speech containing Shiksha (pronunciation method mentioned in Shiksha Shastra) and Swara (related to nature-suffix as per Grammar Shastra). 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)