श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.91.19 
वनं कुरुषु यद् दिव्यं वासोभूषणपत्रवत्।
दिव्यनारीफलं शश्वत् तत्कौबेरमिहैव तु॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'उत्तर कुरुवर्ष में जो चैत्ररथ नामक दिव्य वन है, जिसमें वृक्षों के पत्ते ही दिव्य वस्त्र और आभूषण हैं तथा फल ही दिव्य स्त्रियाँ हैं, वह कुबेर का सनातन दिव्य वन यहाँ आये॥19॥
 
'The divine forest called Chaitrarath in northern Kuruvarsha, in which the divine clothes and ornaments are the leaves of the trees and the divine women are the fruits, may that eternal divine forest of Kubera come here.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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