श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.91.18 
शक्रं याश्चोपतिष्ठन्ति ब्रह्माणं याश्च भामिनी:।
सर्वास्तुम्बुरुणा सार्धमाह्वये सपरिच्छदा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘मैं तुम्बुरु के साथ इन्द्र के दरबार में उपस्थित रहने वाली समस्त अप्सराओं और ब्रह्मा की सेवा में जाने वाली दिव्य अप्सराओं को बुलाता हूँ। वे सब आभूषणों तथा नृत्य-गान के लिए आवश्यक अन्य उपकरणों के साथ यहाँ आएँ।॥18॥
 
‘Along with Tumburu, I call all the Apsaras who attend Indra's court and the celestial nymphs who go to serve Brahma. They should come here with ornaments and other equipment required for dance and song.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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