श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.91.17 
घृताचीमथ विश्वाचीं मिश्रकेशीमलम्बुषाम्।
नागदत्तां च हेमां च सोमामद्रिकृतस्थलीम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'मैं घृताची, विश्वाची, मिश्रकेशी, अलम्बुषा नागदत्त, हेमा, सोम और अदृकृतस्थली (या पर्वत पर रहने वाले सोम) का भी आह्वान करता हूं। 17॥
 
'I also invoke Ghritachi, Vishwachi, Mishrakeshi, Alambusha Nagadatta, Hema, Soma and Adrikritasthali (or Soma who resides on the mountain). 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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