श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.91.16 
आह्वये देवगन्धर्वान् विश्वावसुहहाहुहून्।
तथैवाप्सरसो देवगन्धर्वैश्चापि सर्वश:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'मैं विश्वावसु, हाहा और हूहू जैसे देव-गंधर्वों तथा समस्त अप्सराओं का आह्वान करता हूँ।
 
‘I invoke the Deva-Gandharvas like Visvavasu, Haha and Hoohoo along with all the Apsaras.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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