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ramayan 2.91.14: ‘मैं पृथ्वी और आकाश में पूर्व और पश्चिम की ओर बहने वाली समस्त नदियों का भी आह्वान करता हूँ; कृपया आज यहाँ पधारें।॥14॥   |   ramayan सर्ग 2.91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.91.14 
प्राक्स्रोतसश्च या नद्यस्तिर्यक्स्रोतस एव च।
पृथिव्यामन्तरिक्षे च समायान्त्वद्य सर्वश:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘मैं पृथ्वी और आकाश में पूर्व और पश्चिम की ओर बहने वाली समस्त नदियों का भी आह्वान करता हूँ; कृपया आज यहाँ पधारें।॥14॥
 
‘I also call upon all the rivers flowing east and west on earth and in the sky; please come here today.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)