श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.91.12 
आह्वये विश्वकर्माणमहं त्वष्टारमेव च।
आतिथ्यं कर्तुमिच्छामि तत्र मे संविधीयताम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा, 'मैं विश्वकर्मा त्वष्टा का आह्वान करता हूँ। मेरी इच्छा है कि मैं सेना सहित भरत का आतिथ्य करूँ। वे मेरे लिए आवश्यक व्यवस्था करें।॥12॥
 
He said, 'I invoke the deity Vishwakarma Tvashta. I have a desire to host Bharata along with his army. He should make the necessary arrangements for me.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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