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ramayan 2.91.1: जब भरत ने उस आश्रम में रहने का निश्चय कर लिया, तब ऋषि ने कैकेयी के पुत्र भरत को अपना आतिथ्य स्वीकार करने के लिए आमंत्रित किया ॥1॥   |   ramayan सर्ग 2.91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.91.1 
कृतबुद्धिं निवासाय तत्रैव स मुनिस्तदा।
भरतं केकयीपुत्रमातिथ्येन न्यमन्त्रयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब भरत ने उस आश्रम में रहने का निश्चय कर लिया, तब ऋषि ने कैकेयी के पुत्र भरत को अपना आतिथ्य स्वीकार करने के लिए आमंत्रित किया ॥1॥
 
When Bharata had resolved to stay in that hermitage, the sage invited Bharata, the son of Kaikeyi, to accept his hospitality. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)