| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 90: भरत और भरद्वाज मुनि की भेंट एवं बातचीत तथा मुनि का अपने आश्रम पर ही ठहरने का आदेश देना » श्लोक 8 |
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| | | | श्लोक 2.90.8  | वसिष्ठो भरतश्चैनं पप्रच्छतुरनामयम्।
शरीरेऽग्निषु शिष्येषु वृक्षेषु मृगपक्षिषु॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | वशिष्ठ और भरतने भी महर्षि के शरीर, अग्निहोत्र, शिष्यों, वृक्षों, पत्तों, मृगों, पक्षियों आदि का कुशल समाचार पूछा॥8॥ | | | | Vashishtha and Bharatane also asked about the good news of Maharishi's body, Agnihotra, disciples, trees, leaves, deer, birds etc. 8॥ | | ✨ ai-generated | | |
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