श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 90: भरत और भरद्वाज मुनि की भेंट एवं बातचीत तथा मुनि का अपने आश्रम पर ही ठहरने का आदेश देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.90.6 
ताभ्यामर्घ्यं च पाद्यं च दत्त्वा पश्चात् फलानि च।
आनुपूर्व्याच्च धर्मज्ञ: पप्रच्छ कुशलं कुले॥ ६॥
 
 
अनुवाद
धर्मज्ञ ऋषि ने वशिष्ठ और भरत से क्रमशः जल, अन्न, फल ​​आदि देने का अनुरोध किया और उनके परिवार का कुशलक्षेम पूछा॥6॥
 
The religious sage requested Vashishtha and Bharat to offer water, food, fruits etc. respectively and asked about the well-being of their families. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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