श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 90: भरत और भरद्वाज मुनि की भेंट एवं बातचीत तथा मुनि का अपने आश्रम पर ही ठहरने का आदेश देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.90.20 
त्वय्येतत् पुरुषव्याघ्र युक्तं राघववंशजे।
गुरुवृत्तिर्दमश्चैव साधूनां चानुयायिता॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'मानसिंह! आप रघुकुल में जन्मे हैं। यह उचित है कि आपमें बड़ों की सेवा, अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण और सज्जन पुरुषों का अनुसरण करने की भावना हो।'
 
'Mansingh! You were born in the Raghukul family. It is appropriate that you should have the feeling of serving your elders, controlling your senses and following the noble men.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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