|
| |
| |
श्लोक 2.9.8  |
श्रुत्वैवं वचनं तस्या मन्थरायास्तु कैकयी।
किंचिदुत्थाय शयनात् स्वास्तीर्णादिदमब्रवीत्॥ ८॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| मन्थरा के ये वचन सुनकर कैकेयी सुन्दर बिछे हुए पलंग से थोड़ा उठकर उससे इस प्रकार बोलीं-॥8॥ |
| |
| On hearing these words of Manthra, Kaikeyi got up a little from the nicely spread bed and spoke to him thus -॥ 8॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|