श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.9.7 
मयोच्यमानं यदि ते श्रोतुं छन्दो विलासिनि।
श्रूयतामभिधास्यामि श्रुत्वा चैतद् विधीयताम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'विलासिनी! यदि तुम मुझसे इसे सुनने का आग्रह करती हो तो मैं तुम्हें बताता हूँ, इसे सुनो और उसके अनुसार आचरण करो।'॥7॥
 
'Vilasini! If you insist on hearing it from me then I will tell you, listen to it and act accordingly.'॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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