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श्लोक 2.9.7  |
मयोच्यमानं यदि ते श्रोतुं छन्दो विलासिनि।
श्रूयतामभिधास्यामि श्रुत्वा चैतद् विधीयताम्॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| 'विलासिनी! यदि तुम मुझसे इसे सुनने का आग्रह करती हो तो मैं तुम्हें बताता हूँ, इसे सुनो और उसके अनुसार आचरण करो।'॥7॥ |
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| 'Vilasini! If you insist on hearing it from me then I will tell you, listen to it and act accordingly.'॥ 7॥ |
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