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श्लोक 2.9.63  |
यमस्य वा मां विषयं गतामितो
निशम्य कुब्जे प्रतिवेदयिष्यसि।
वनं गते वा सुचिराय राघवे
समृद्धकामो भरतो भविष्यति॥ ६३॥ |
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| अनुवाद |
| 'कुब्ज! अब या तो भरत की इच्छा तब पूरी होगी जब रामचन्द्र दीर्घकाल के लिए वन में चले जाएँगे अथवा तुम यह समाचार सुनकर राजा को बता दोगी कि मैं यहाँ से यमलोक चला गया हूँ॥ 63॥ |
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| 'Kubje! Now either Bharata's desire will be fulfilled when Ramachandra goes to the forest for a long time or you will convey this news to the king after hearing that I have gone to Yamaloka from here.॥ 63॥ |
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