श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.9.62 
तथातिविद्धा महिषीति कुब्जया
समाहता वागिषुभिर्मुहुर्मुहु:।
विधाय हस्तौ हृदयेऽतिविस्मिता
शशंस कुब्जां कुपिता पुन: पुन:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
जब कुब्जा ने इस प्रकार अपने वचनरूपी बाणों से रानी कैकेयी पर बार-बार प्रहार किया, तब वह अत्यन्त विस्मित और क्रोधित हो गई और अपने दोनों हाथों को हृदय पर रखकर बार-बार कुब्जा से इस प्रकार कहने लगी -॥62॥
 
When Kubja repeatedly attacked Queen Kaikeyi with the arrows of her words in this manner, she became very astonished and angry and placing both her hands on her heart, she repeatedly started saying to Kubja as follows -॥ 62॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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