श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  2.9.61 
प्रपत्स्यते राज्यमिदं हि राघवो
यदि ध्रुवं त्वं ससुता च तप्स्यसे।
ततो हि कल्याणि यतस्व तत् तथा
यथा सुतस्ते भरतोऽभिषेक्ष्यते॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
'कल्याणी! यदि श्री राम इस राज्य को प्राप्त कर लेंगे तो निश्चय ही तुम अपने पुत्र भरत सहित महान संकट में पड़ जाओगी; अतः ऐसा प्रयत्न करो कि तुम्हारे पुत्र भरत का राज्याभिषेक हो जाए॥61॥
 
'Kalyani! If Shri Ram attains this kingdom then surely you along with your son Bharat will be in great trouble; Therefore, make such efforts that your son Bharat gets crowned. 61॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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