श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.9.6 
किं न स्मरसि कैकेयि स्मरन्ती वा निगूहसे।
यदुच्यमानमात्मार्थं मत्तस्त्वं श्रोतुमिच्छसि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
कैकेयी! क्या तुम्हें याद नहीं है? या याद होने पर भी तुम मुझसे छिपा रही हो? क्या तुम मुझसे अपना वह उद्देश्य सुनना चाहती हो जिसके बारे में तुम मुझसे बार-बार चर्चा करती रहती हो? इसका क्या कारण है?
 
‘Kaikeyi! Do you not remember? Or are you hiding it from me even after remembering? Do you want to hear from me about your purpose which you keep discussing with me many times? What is the reason for this?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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