श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  2.9.54 
गतोदके सेतुबन्धो न कल्याणि विधीयते।
उत्तिष्ठ कुरु कल्याणं राजानमनुदर्शय॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
कल्याणी! नदी का जल जब उतर जाता है, तब उस पर बाँध नहीं बनाया जाता। (यदि राम का अभिषेक हो जाए, तो तुम्हारा वर माँगना व्यर्थ हो जाएगा; इसलिए बातों में समय नष्ट मत करो) शीघ्र उठो और अपना कल्याण करो। कोपभवन में जाकर राजा से अपना हाल कहो॥ 54॥
 
‘Kalyani! A dam is not built for a river when its water recedes. (If Rama is anointed, then your asking for a boon will be futile; therefore do not waste time in talking) Get up quickly and do good to yourself. Go to the Kop Bhawan and tell the king about your condition.’॥ 54॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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