श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.9.5 
हन्तेदानीं प्रपश्य त्वं कैकेयि श्रूयतां वच:।
यथा ते भरतो राज्यं पुत्र: प्राप्स्यति केवलम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'केकयनन्दिनी! अच्छा, अब देखो मैं क्या करता हूँ। तुम मेरी बात सुनो, जिससे तुम्हारे पुत्र भरत को ही राज्य मिलेगा (श्रीराम को नहीं)।॥5॥
 
'Kekayanandini! Well, now see what I do. You listen to me, by which only your son Bharat will get the kingdom (not Shri Ram).॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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