| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश » श्लोक 40 |
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| | | | श्लोक 2.9.40  | नाहं समवबुद्धॺेयं कुब्जे राज्ञश्चिकीर्षितम्।
सन्ति दु:संस्थिता: कुब्जा: वक्रा: परमपापिका:॥ ४०॥ | | | | | | अनुवाद | | 'कुब्जा! यदि तुम न होतीं, तो मैं राजा द्वारा रचे जा रहे षड्यंत्र को कभी न समझ पाता। तुम्हारे अतिरिक्त सभी कुब्जाएँ बेडौल शरीर वाली, टेढ़ी-मेढ़ी और महापापी हैं। | | | | ‘Kubja! If you were not there, I would never have understood the conspiracy that the king wants to hatch. Apart from you, all the Kubjaas have shapeless bodies, are crooked and are very sinful. | | ✨ ai-generated | | |
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