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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश
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श्लोक 4
श्लोक
2.9.4
एवमुक्ता तु सा देव्या मन्थरा पापदर्शिनी।
रामार्थमुपहिंसन्ती कैकेयीमिदमब्रवीत्॥ ४॥
अनुवाद
देवी कैकेयी की यह बात सुनकर पाप का मार्ग दिखाने वाली मन्थरा श्री राम के स्वार्थ पर प्रहार करती हुई कैकेयी से इस प्रकार बोली-॥4॥
Upon hearing Goddess Kaikeyi say this, Manthra, who shows the path of sin, attacking the selfishness of Shri Ram, spoke to Kaikeyi thus -॥ 4॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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