श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.9.31 
चतुर्दश हि वर्षाणि रामे प्रव्राजिते वनम्।
रूढश्च कृतमूलश्च शेषं स्थास्यति ते सुत:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
‘जब श्री राम चौदह वर्ष के लिए वन में चले जाएँगे, तब आपके पुत्र भरत का राज्य सुदृढ़ हो जाएगा और वह प्रजा आदि को वश में करके यहाँ अपनी जड़ें जमा लेगा। फिर चौदह वर्ष के बाद भी वह आजीवन स्थिर रहेगा।॥31॥
 
‘When Shri Ram goes to the forest for fourteen years, your son Bharat's kingdom will become strong and by subduing the subjects etc. he will establish his roots here. Then even after fourteen years, he will remain stable for life.॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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