श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.9.3 
इदं त्विदानीं सम्पश्य केनोपायेन साधये।
भरत: प्राप्नुयाद् राज्यं न तु राम: कथंचन॥ ३॥
 
 
अनुवाद
"परन्तु इस समय तुम उस उपाय पर विचार करो जिससे मैं अपना अभीष्ट कार्य प्राप्त कर सकूँ। यदि भरत को राज्य मिल जाए और श्री राम उसे किसी प्रकार प्राप्त न कर सकें, तो यह कैसे संभव हो सकता है?"॥3॥
 
"But at this time, think about the means by which I can achieve my desired goal. How can this be accomplished if Bharata gets the kingdom and Shri Ram is not able to get it in any way?"॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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