श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.9.28 
यौ तौ देवासुरे युद्धे वरौ दशरथो ददौ।
तौ स्मारय महाभागे सोऽर्थो न त्वा क्रमेदति॥ २८॥
 
 
अनुवाद
महाभाग्य! राजा दशरथ को उन दो वरदानों का स्मरण कराओ जो उन्होंने तुम्हें देवताओं और दानवों के युद्ध के समय दिए थे। वरदान के रूप में मांगी गई तुम्हारी अभीष्ट इच्छा अधूरी नहीं रह सकती॥ 28॥
 
‘Mahabhagya! Remind King Dasharath of the two boons he had given you during the war between gods and demons. Your desired wish which was asked for as a boon cannot remain unfulfilled.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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