श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.9.26 
न ह्यतिक्रमितुं शक्तस्तव वाक्यं महीपति:।
मन्दस्वभावे बुध्यस्व सौभाग्यबलमात्मन:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
महाराज, आपकी प्रार्थना किसी भी प्रकार टाल नहीं सकते। हे मुग्धे! अपने सौभाग्य की शक्ति को स्मरण करो॥ 26॥
 
‘Maharaj cannot avoid your request in any way. O Mugdhe! Remember the power of your good fortune.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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