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श्लोक 2.9.26  |
न ह्यतिक्रमितुं शक्तस्तव वाक्यं महीपति:।
मन्दस्वभावे बुध्यस्व सौभाग्यबलमात्मन:॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| महाराज, आपकी प्रार्थना किसी भी प्रकार टाल नहीं सकते। हे मुग्धे! अपने सौभाग्य की शक्ति को स्मरण करो॥ 26॥ |
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| ‘Maharaj cannot avoid your request in any way. O Mugdhe! Remember the power of your good fortune.॥ 26॥ |
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