श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.9.21 
चतुर्दश हि वर्षाणि रामे प्रव्राजिते वनम्।
प्रजाभावगतस्नेह: स्थिर: पुत्रो भविष्यति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
‘जब श्री राम चौदह वर्ष के लिए वन में चले जाएँगे,’ उस समय में आपका पुत्र भरत समस्त प्रजा के हृदय में अपने लिए प्रेम उत्पन्न करेगा और इस राज्य में प्रतिष्ठित होगा॥ 21॥
 
'When Shri Ram goes to the forest for fourteen years,' then in that time your son Bharat will create love for himself in the hearts of all the people and will establish himself in this kingdom.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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