श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.9.20 
तौ च याचस्व भर्तारं भरतस्याभिषेचनम्।
प्रव्राजनं च रामस्य वर्षाणि च चतुर्दश॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'अपने पति से दो वरदान मांगो। एक वरदान में भरत का राज्याभिषेक और दूसरे में राम को चौदह वर्ष का वनवास।'
 
‘Ask for those two boons from your husband. With one boon ask for Bharat's coronation and with the other ask for Rama's exile for fourteen years.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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