श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.9.19 
कथैषा तव तु स्नेहान्मनसा धार्यते मया।
रामाभिषेकसम्भारान्निगृह्य विनिवर्तय॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘तब से तुम्हारे स्नेह के कारण मेरे मन में यह बात सदैव स्मरण रहती है। इन वरदानों के प्रभाव से तुम स्वामी को वश में करो और श्री राम के राज्याभिषेक की योजना को उलट दो।॥19॥
 
‘Since then, due to your affection, I have always remembered this in my mind. By using the influence of these boons, subdue Swami and reverse the plan of Shri Ram's coronation.॥ 19॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas