| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश » श्लोक 16 |
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| | | | श्लोक 2.9.16  | अपवाह्य त्वया देवि संग्रामान्नष्टचेतन:।
तत्रापि विक्षत: शस्त्रै: पतिस्ते रक्षितस्त्वया॥ १६॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘देवी! जब राजा मूर्च्छित हो गए थे, तब आपने सारथी बनकर अपने पति को युद्धभूमि से दूर ले जाकर उनकी रक्षा की थी। जब वे वहाँ भी राक्षसों के शस्त्रों से घायल हो गए थे, तब भी आपने उन्हें वहाँ से दूर ले जाकर उनकी रक्षा की थी॥16॥ | | | | ‘Devi! When the king almost lost his consciousness, you, acting as the charioteer, protected your husband by taking him away from the battlefield. When he was wounded there also by the weapons of the demons, you again protected him by taking him away from there.॥16॥ | | ✨ ai-generated | | |
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