श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.9.14 
तस्मिन् महति संग्रामे पुरुषान् क्षतविक्षतान्।
रात्रौ प्रसुप्तान् घ्नन्ति स्म तरसापास्य राक्षसा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'उस महासमर में घायल हुए पुरुष जब रात्रि में सो जाते थे, तब राक्षस उन्हें शय्या से घसीटकर मार डालते थे॥14॥
 
'When the men wounded in that great battle fell asleep in the night, the demons would drag them from their beds and kill them.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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