श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 89: भरत का सेना सहित गङ्गापार करके भरद्वाज के आश्रम पर जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.89.6 
गुहस्य तत् तु वचनं श्रुत्वा स्नेहादुदीरितम्।
रामस्यानुवशो वाक्यं भरतोऽपीदमब्रवीत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
गुह के द्वारा प्रेमपूर्वक कहे गए इन वचनों को सुनकर श्री राम के अधीन रहने वाले भरत ने इस प्रकार कहा:-॥6॥
 
On hearing these words spoken with affection by Guha, Bharata, who was under the command of Sri Rama, said thus:-॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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