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श्लोक 2.89.10  |
ते तथोक्ता: समुत्थाय त्वरिता राजशासनात्।
पञ्च नावां शतान्येव समानिन्यु: समन्तत:॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| गुह की यह बात सुनकर राजा की आज्ञा से सब नाविक तुरन्त उठ खड़े हुए और चारों ओर से पाँच सौ नावें इकट्ठी कर लीं॥10॥ |
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| On hearing Guha say this, on their king's command all the boatmen quickly stood up and gathered five hundred boats from all around.॥10॥ |
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