श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 89: भरत का सेना सहित गङ्गापार करके भरद्वाज के आश्रम पर जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.89.10 
ते तथोक्ता: समुत्थाय त्वरिता राजशासनात्।
पञ्च नावां शतान्येव समानिन्यु: समन्तत:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
गुह की यह बात सुनकर राजा की आज्ञा से सब नाविक तुरन्त उठ खड़े हुए और चारों ओर से पाँच सौ नावें इकट्ठी कर लीं॥10॥
 
On hearing Guha say this, on their king's command all the boatmen quickly stood up and gathered five hundred boats from all around.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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