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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 89: भरत का सेना सहित गङ्गापार करके भरद्वाज के आश्रम पर जाना
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श्लोक 1
श्लोक
2.89.1
व्युष्य रात्रिं तु तत्रैव गङ्गाकूले स राघव:।
काल्यमुत्थाय शत्रुघ्नमिदं वचनमब्रवीत्॥ १॥
अनुवाद
श्रृंगवेरपुर में ही गंगाजी के तट पर रात्रि व्यतीत करके प्रातःकाल उठकर रघुकुलनन्दन भरत शत्रुघ्न से इस प्रकार बोले- 1॥
After spending the night on the banks of Ganga in Shringaverpur itself, Raghukulnandan Bharat woke up in the morning and spoke to Shatrughan thus - 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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