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श्लोक 2.88.29  |
अभिषेक्ष्यन्ति काकुत्स्थमयोध्यायां द्विजातय:।
अपि मे देवता: कुर्युरिमं सत्यं मनोरथम्॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| 'अयोध्या में ब्राह्मण ककुत्स्थ कुल के रत्न श्री राम का अभिषेक करेंगे। क्या देवता मेरी यह इच्छा पूरी करेंगे?॥ 29॥ |
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| 'In Ayodhya, the Brahmins will anoint Shri Ram, the jewel of the Kakutstha clan. Will the gods make this wish of mine come true?॥ 29॥ |
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