श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 87: भरत की मूर्छा से गुह, शत्रुघ्न और माताओं का दुःखी होना, भरत का गुह से श्रीराम आदि के भोजन और शयन आदि के विषय में पूछना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.87.22 
एतत् तदिङ्गुदीमूलमिदमेव च तत् तृणम्।
यस्मिन् रामश्च सीता च रात्रिं तां शयितावुभौ॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘यही इंगुदी वृक्ष की जड़ है और यही वह घास है, जिस पर श्री राम और सीता दोनों रात्रि में सोते थे।॥ 22॥
 
‘This is the root of the Ingudi tree and this is the grass where both Shri Ram and Sita slept at night.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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