श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 87: भरत की मूर्छा से गुह, शत्रुघ्न और माताओं का दुःखी होना, भरत का गुह से श्रीराम आदि के भोजन और शयन आदि के विषय में पूछना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.87.18 
लक्ष्मणेन यदानीतं पीतं वारि महात्मना।
औपवास्यं तदाकार्षीद् राघव: सह सीतया॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'श्री रामजी ने सीताजी सहित उस रात्रि को उपवास किया। महात्माजी ने केवल वही जल पिया जो लक्ष्मणजी लाए थे।॥18॥
 
‘Sri Rama along with Sita fasted that night. The great soul drank only the water that Lakshman had brought.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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