श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 87: भरत की मूर्छा से गुह, शत्रुघ्न और माताओं का दुःखी होना, भरत का गुह से श्रीराम आदि के भोजन और शयन आदि के विषय में पूछना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.87.11 
कच्चिन्न लक्ष्मणे पुत्र श्रुतं ते किंचिदप्रियम्।
पुत्रे वा ह्येकपुत्राया: सहभार्ये वनं गते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
"बेटा! सच-सच बताओ, क्या तुमने लक्ष्मण के बारे में या श्री राम के बारे में कोई अप्रिय बात सुनी है, जो एक ही पुत्र वाली माँ के पुत्र सीता के साथ वन गए थे?"
 
"Son! Tell me the truth, have you heard anything unpleasant about Lakshmana or about Shri Ram who went to the forest with Sita, the son of a mother with only one son?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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