श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 86: निषादराज गुह के द्वारा लक्ष्मण के सद्भाव और विलाप का वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.86.7 
सोऽहं प्रियसखं रामं शयानं सह सीतया।
रक्षिष्यामि धनुष्पाणि: सर्वै: स्वैर्ज्ञातिभि: सह॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘इसलिए मैं अपने समस्त बंधु-बांधवों सहित धनुष लेकर सीता के साथ शयन करने वाले अपने प्रिय मित्र श्री रामजी की रक्षा करूँगा॥ 7॥
 
‘Therefore, along with all my relatives, I will protect my dear friend Shri Ram, who is sleeping with Sita, with bow in my hand.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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