श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 86: निषादराज गुह के द्वारा लक्ष्मण के सद्भाव और विलाप का वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.86.25 
जटाधरौ तौ द्रुमचीरवाससौ
महाबलौ कुञ्जरयूथपोपमौ।
वरेषुधीचापधरौ परंतपौ
व्यपेक्षमाणौ सह सीतया गतौ॥ २५॥
 
 
अनुवाद
सिर पर जटाएँ और छाल तथा वस्त्र धारण किए हुए पराक्रमी शत्रुसंहारक श्री राम और लक्ष्मण दो हाथी सवारों के समान प्रतीत हो रहे थे। वे सुन्दर तरकस और धनुष लिए हुए इधर-उधर देखते हुए सीता के साथ चल रहे थे।॥ 25॥
 
'Wearing matted hair on their heads and dressed in bark and cloth, the mighty, enemy-destroyer Shri Ram and Lakshman looked like two elephant-riders. They went with Sita, looking here and there, carrying a beautiful quiver and bow.'॥ 25॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रारामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे षडशीतितम: सर्ग:॥ ८६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें छियासीवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ८६॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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