श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 86: निषादराज गुह के द्वारा लक्ष्मण के सद्भाव और विलाप का वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.86.22 
अपि सत्यप्रतिज्ञेन सार्धं कुशलिना वयम्।
निवृत्ते समये ह्यस्मिन् सुखिता: प्रविशेमहि॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'क्या हम लोग इस वनवास की अवधि पूरी होने पर सकुशल लौटे हुए सत्यवादी श्री राम के साथ अयोध्यापुरी में प्रवेश कर सकेंगे?'॥ 22॥
 
'Will we be able to enter Ayodhyapuri after the completion of this period of exile along with the truthful Shri Ram who has returned safely?'॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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