श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 86: निषादराज गुह के द्वारा लक्ष्मण के सद्भाव और विलाप का वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.86.15 
कौसल्या चैव राजा च तथैव जननी मम।
नाशंसे यदि ते सर्वे जीवेयु: शर्वरीमिमाम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'मैं यह नहीं कह सकता कि रानी कौशल्या, राजा दशरथ और मेरी माता सुमित्रा आज रात तक जीवित रहेंगे या नहीं ॥ 15॥
 
'I cannot say whether Queen Kausalya, King Dasharatha and my mother Sumitra will survive till this night or not.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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