श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 85: गुह और भरत की बातचीत तथा भरत का शोक  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.85.9 
मा भूत् स कालो यत् कष्टं न मां शङ्कितुमर्हसि।
राघव: स हि मे भ्राता ज्येष्ठ: पितृसमो मत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
निषादराज! ऐसा समय कभी न आए। आपकी बातें सुनकर मुझे बहुत दुःख हुआ है। आप मुझ पर संदेह न करें। श्री रघुनाथजी मेरे बड़े भाई हैं। मैं उन्हें पिता के समान मानता हूँ॥ 9॥
 
‘Nishadraj! May such a time never come. I am very sad to hear your words. You should not doubt me. Shri Raghunathji is my elder brother. I consider him like a father.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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