श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 85: गुह और भरत की बातचीत तथा भरत का शोक  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.85.8 
तमेवमभिभाषन्तमाकाश इव निर्मल:।
भरत: श्लक्ष्णया वाचा गुहं वचनमब्रवीत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर अंधकारमय आकाश के समान पवित्र भरत ने मधुर वाणी में कहा-॥8॥
 
Saying this, Bharata, who was as pure as the dark sky, said in a sweet voice -॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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