| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 85: गुह और भरत की बातचीत तथा भरत का शोक » श्लोक 6 |
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| | | | श्लोक 2.85.6  | दाशास्त्वनुगमिष्यन्ति देशज्ञा: सुसमाहिता:।
अहं चानुगमिष्यामि राजपुत्र महाबल॥ ६॥ | | | | | | अनुवाद | | हे महाबली राजकुमार! आपके साथ बहुत से नाविक चलेंगे, जो इस क्षेत्र से भली-भाँति परिचित हैं और इसे भली-भाँति जानते हैं। उनके अतिरिक्त मैं भी आपके साथ चलूँगा॥6॥ | | | | 'O mighty prince! Many boatmen will accompany you, who are well acquainted with this region and are well aware of it. Apart from them, I will also accompany you.॥ 6॥ | | ✨ ai-generated | | |
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