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श्लोक 2.85.13  |
शाश्वती खलु ते र्कीतिर्लोकाननु चरिष्यति।
यस्त्वं कृच्छ्रगतं रामं प्रत्यानयितुमिच्छसि॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| तुम दुःखमय वन में निवास करने वाले भगवान् राम को वापस लाना चाहते हो; इससे तुम्हारा चिरस्थायी यश समस्त लोकों में फैल जाएगा। ॥13॥ |
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| "You wish to bring back Lord Rama, who is residing in the painful forest; this will spread your everlasting fame in all the worlds." ॥13॥ |
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