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श्लोक 2.85.11  |
स तु संहृष्टवदन: श्रुत्वा भरतभाषितम्।
पुनरेवाब्रवीद् वाक्यं भरतं प्रति हर्षित:॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| भरत के वचन सुनकर निषाद्रराज का मुख हर्ष से खिल उठा। हर्ष से भरकर वे पुनः भरत से बोले-॥11॥ |
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| On hearing Bharata's words, the face of the king of Nishadra blossomed with joy. Filled with delight, he again spoke to Bharata -॥ 11॥ |
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