श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 85: गुह और भरत की बातचीत तथा भरत का शोक  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.85.11 
स तु संहृष्टवदन: श्रुत्वा भरतभाषितम्।
पुनरेवाब्रवीद् वाक्यं भरतं प्रति हर्षित:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भरत के वचन सुनकर निषाद्रराज का मुख हर्ष से खिल उठा। हर्ष से भरकर वे पुनः भरत से बोले-॥11॥
 
On hearing Bharata's words, the face of the king of Nishadra blossomed with joy. Filled with delight, he again spoke to Bharata -॥ 11॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas