श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 84: निषादराज गुह का अपने बन्धुओं भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.84.14 
एतत् तु वचनं श्रुत्वा सुमन्त्राद् भरत: शुभम्।
उवाच वचनं शीघ्रं गुह: पश्यतु मामिति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
सुमन्त्र के ये शुभ वचन सुनकर भरत बोले, 'निषादराज गुह को शीघ्र ही मुझसे मिलने के लिए बुलाओ।'
 
Hearing these auspicious words from Sumantrā, Bharata said, 'Let arrangements be made for Guha, the king of Nishads, to meet me soon.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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