श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.83.8 
मेघश्यामं महाबाहुं स्थिरसत्त्वं दृढव्रतम्।
कदा द्रक्ष्यामहे रामं जगत: शोकनाशनम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
(वे आपस में कहते थे-) 'जो श्यामवर्ण और पराक्रमी हैं, जो उत्तम व्रतों का दृढ़तापूर्वक पालन करते हैं और जगत के दुःखों को दूर करते हैं, जो अपनी बुद्धि में अडिग हैं, उन श्री रामजी को हम कब देखेंगे?॥ 8॥
 
(They used to say among themselves -) 'When will we see Shri Ram, the dark complexioned and powerful man, who firmly observes the best vows and removes the sorrows of the world, who is steadfast in his wisdom?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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