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ramayan 2.83.6: कैकेयी, सुमित्रा और यशस्वी कौशल्यादेवी भी यात्रा से संतुष्ट होकर श्री रामचन्द्रजी को वापस लाने के लिए तेजस्वी रथ पर सवार होकर चल दीं।   |   ramayan सर्ग 2.83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.83.6 
कैकेयी च सुमित्रा च कौसल्या च यशस्विनी।
रामानयनसंतुष्टा ययुर्यानेन भास्वता॥ ६॥
 
 
अनुवाद
कैकेयी, सुमित्रा और यशस्वी कौशल्यादेवी भी यात्रा से संतुष्ट होकर श्री रामचन्द्रजी को वापस लाने के लिए तेजस्वी रथ पर सवार होकर चल दीं।
 
Kaikeyi, Sumitra and the famous Kausalya Devi also left in the brilliant chariot, satisfied with the journey to bring back Shri Ramchandraji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)