vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास
»
श्लोक 6
श्लोक
2.83.6
कैकेयी च सुमित्रा च कौसल्या च यशस्विनी।
रामानयनसंतुष्टा ययुर्यानेन भास्वता॥ ६॥
अनुवाद
कैकेयी, सुमित्रा और यशस्वी कौशल्यादेवी भी यात्रा से संतुष्ट होकर श्री रामचन्द्रजी को वापस लाने के लिए तेजस्वी रथ पर सवार होकर चल दीं।
Kaikeyi, Sumitra and the famous Kausalya Devi also left in the brilliant chariot, satisfied with the journey to bring back Shri Ramchandraji.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd